10th हिंदी Chapter 3 अति सुधो स्नेह को मारग है सब्जेक्टिव

 कक्षा 10 हिंदी पाठ 3 अति सुधो स्नेह को मारग है सब्जेक्टिव क्वेश्चन - Ati sudho saneh ko marag hai subjective question 

इस लेख में Ati sudho saneh ko marag hai subjective question - अति सुधो स्नेह को मारग है सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है। 

अगर आप class 10th में है और बोर्ड परीक्षा में जाने वाले हैं तो इस पेज को एक बार पूरा अवश्य पढ़ें। 

क्योंकि इस लेख में कक्षा दसवीं हिंदी गोधूली भाग 2 के कविता  Ati sudho saneh ko marag hai subjective question - अति सुधो स्नेह को मारग है सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है। जो आपके परीक्षा में पूछे जा सकते है तो अपने तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नीचे दिए गए सभी प्रश्नों को अवश्य पढ़ें।

अति सुधो स्नेह को मारग है सब्जेक्टिव
अति सुधो स्नेह को मारग है सब्जेक्टिव क्वेश्चन

Bihar board matric exam 2023 subjective question 

1. कवि प्रेममार्ग को 'अति सुधो' क्यों कहा है? इस मार्ग की विशेषता क्या?

उत्तर: सरल और निष्कपट होने के कारण कवि प्रेममार्ग को अति सुधो कहा है। इस मार्ग कि यह विशेषता है कि इसमे कपटी और छली लोगों के लिए कोई जगह नही है।

2. 'मन लेहु पै देहु हुं छटाक नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: 'मन लेहुं पै देहुं छटाँक नहीं' से छवि का अभिप्राय यह है कि सुजान ने मेरा सब कुछ ले लिया किंतु जब प्रबिदान का वक्त आया तो सीधे मुकर गई।

3. द्वितीय द्वंद्र किसे संबोधित है और क्यो?

उत्तर: द्वितीय द्वंद मे छवि ने मेघ (बादल) हो संबोधित किया है। मेघ हमेशा दूसरों के हित के लिए खुद को भुला देता है। न्योछावर कर देता है घुम-घूम कर बरसता है।

4. परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है? स्वष्ट स्पष्ट करे।

उत्तर: परहित के लिए ही मेहा देह धारण करता है। वह परोपकारी होता है। बिना भेदभाव के वह सब को सरस करता है इसलिए उसका एक नाम 'परजन्य' भी है।

5. कवि कहा अपने आँसुओं को पहुंचाना चाहता है? और क्यों ? 

उत्तर: कवि अपने आसुओं को मेघ के द्वारा अपनी प्रेमिका सुजान के आँगन तक पहुँचाना चाहता है जिससे वह कवि के पीड़ा से अवगत हो सके।


6. व्याख्या करें 
(क) यहाँ एक तै दूसरों आंक नहीं। 

उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तिका गोधूलि भाग-2 काव्यखण्ड के कविता "अति सुधो सनेह को मारग है" से लिया गया है। इसके कवि घनानंद जी है।

प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि ने प्रेममार्ग को सुगम सरल, पवित्र कहते हुए कहाँ है कि प्रेम के मार्ग में छल, कपट और चतुराई के लिए कोई जगह नहीं है। यह पथ अद्वितीय है यहाँ सिर्फ निष्कपट लोग ही चलते है।

(ख) कछु मेरियो पीर छिए परसौ। 

उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तिका गोधूली भाग-2 के काव्यखण्ड के कविता " मो असुवानिहिं लै बरखौ " से लिया गया है। जिसके कवि धनानंद जी है। प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि बादल से कहना चाहता है कि तुम परोपकारी हो दूसरे को उपकार करते हो। एक उपकार मुझ पर भी कर दो। मेरे आसूं लेकर मेरी पीड़ा लेकर सुजान के आंगन मे बरस जाओं।

Class 10th hindi subjective question 2023

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